धरती का मानव

छान रहा, सारा ब्रह्मांड,
यह धरती का मानव,

ले जीवन की अभिलाषा,
तोड़ धरती का विश्वास,
रहा चिंघाड़ खुले अंतरिक्ष में,
यह धरती का मानव,

भेद दिए सारे ग्रह,
जीवन-तत्वों की आस,
जल,वायु, मिट्टी, गगन
और धरती जैसा प्रकाश,
खोजे विज्ञान, भेज कर यान,
करेगा भविष्य में पलायन,
यह धरती का मानव,

मिटा संतुलन पंचतत्व का,
करें अपना विकास,
उजाड़ करे धरती सारी,
यह मानुष की जमात,
जन्म दायिनी को कर विषाक्त,
अरबों अरब तारों में,
ढूंढे अपना नया बसेरा,
यह धरती का मानव,

धरती जैसा मातृत्व नहीं
खोद ले समस्त ब्रह्मांड
भेज चाहे जितने अंतरिक्ष यान
करले संरक्षण धरती और
पशु पक्षी जलचर सबका
रखो मानव जाति का मान,
ओ धरती के मानव

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