गुलमेंहदी की खुशबू

नीरा और मैं ट्रेन की तरफ दौड़ रहे थे। भागते- भागते बड़ी परेशानी के बाद हम दोनों ने ट्रेन पकड़ ली। दुर्भाग्य से, हम अपने कोच में नहीं चढ़ पाए और लेडीज कोच चढ़ गए। डिब्बे में बिल्कुल जगह नहीं थी। यहां तक कि हम ठीक से खड़े नहीं हो सकते थे। नीरा ने हम दोनों के लिए सीट खोजना शुरू की, कुछ ही मिनटों में उसे ऊपर बर्थ पर जगह मिली। हम ऊपर की बर्थ पर बैठ गए।
वहां से नीचे नजारा बिल्कुल अच्छा नहीं था। महिलाएं बिल्लियों की तरह बहस कर रही थीं और बर्थ के लिए लड़ रही थीं। बच्चे रो रहे थे क्योंकि उनका दम घुट रहा था और वे भूखे भी थे। नीरा ने मेरी तरफ अजीब से देखा । मैं समझ नहीं पा रही थी कि वो क्या सोच रही थी इसलिए मैंने उसे टोका। उसने मुझे कोहनी मारकर एक अधेड़ उम्र की महिला की तरफ इशारा किया, जो फर्श पर बैठी और खिड़की से बाहर देख रही थी। शायद किसी का इंतजार कर रही थी। “क्या वह मानसिक रूप से विकलांग है,” मैंने पूछा। नीरा ने सिर हिलाया और उसके पेट की ओर इशारा किया। जो देखने से गर्भवती लग रही थी। नीरा असमंजस में थी और बोली उसके साथ ऐसा किसने किया। मैं सोचने या बोलने की हालत में नहीं थी। मेरा दिमाग एकदम से सन्न हो गया। इंसानी फितरत यह है कि वो पहले नकारात्मक सोचता है बाद में अपने को कोस कर अपने दिमाग को सकारात्मक सोचने को मजबूर करता है। नीरा उस महिला को देखकर बहुत उदास थी।
नीरा- एक सामान्य व्यक्ति के लिए भी प्यार ढूंढ़ पाना कितना मुश्किल है। फिर ये?
मैं – हो सकता है वो शायद शादीशुदा हो?
नीरा- मुझे ऐसा नहीं लगता। शादी जैसे मामले में लड़कों को एक लड़की में सब कुछ चाहिए सुंदर हो, पढ़ी लिखी हो, जॉब करती हो। इसे देखो ,कोई उससे शादी क्यों करेगा?
( वो सुंदर तो नहीं थीं सांवला रंग, रूखे और कटे बाल, छोटी नाक, फटे होंठ, काले घेरे वाली छोटी छोटी आंखें थी)
मानव का एक स्वाभाविक विचार है शक या संदेह। हम सब चाहे कितनी भी मानवता दिखा ले शक करना कभी नहीं छोड़ते , जो अभी मैं और नीरा कर रहे थे। मेरा दिमाग ब्लॉक हो गया था।
कुछ दूसरी महिलाएं कोच में जगह ना होने के कारण एक – दूसरे को धक्का देने लगीं। “उसे मार नहीं, वह लगभग चिल्लायी, यह गर्भवती है” उस आवाज़ के साथ मैं वापस अपने होश में आयी। एक बूढ़ी दादी ने सबको उस महिला को धक्का देने से रोका और पानी व कुछ खाने को दिया।
अब मैं सोचने लगी कि उसके साथ क्या होता है, कुछ बेहद क्रूर और अमानवीय कहानियां मेरे दिमाग में तैर रही थीं, मैं उन्हें शांत नहीं कर पा थी। कुछ अन्य महिला यात्री उसे घूर रहे थीं, मेरी तरह और शायद मेरे मन में जो शक था उनके मन में भी थे। उन बूढ़ी दादी ने थोडी जगह बनाने के लिए 3-4 बैग सीट के नीचे रख दिए और खिड़की की सीट के पास उस दिमागी रूप से कमजोर महिला के लिए कुछ जगह बनाई। वह महिला सभी से अनजान थी, वह बाहर के दृश्य का आनंद ले रही थी।

दो घंटे के बाद हम अगले स्टेशन पर पहुंचे। अचानक एक छोटा, भूरा सा और अधेड़ उम्र का आदमी खिड़की पर आया। वह जोर से हांफ रहा था। वह धीरे से मुस्कुराया, खिड़की से ही उसने अपना हाथ हवा में हिला कर महिला से पूछा कि क्या वह ठीक है? महिला से मुस्कुरा के सर हिला कर हां कर दिया। ट्रेन फिर से ट्रैकर्स पर रेंगने लगी। वह आदमी उस विक्षिप्त महिला के लिए चिंतित था। लेकिन ट्रेन हॉर्न दे चुकी थी बूढ़ी दादी ने मुस्कुरा कर उस आदमी को आश्वस्त किया। ट्रेन चल पड़ी और वह बगल के कोच में चड़ गया। बूढ़ी दादी तभी एक दूसरी सहयात्री के पूछने पर बताती हैं कि वह आदमी इस गर्भवती महिला के पति है। क्योंकि पुरुषों को लेडीज कोच में प्रवेश की अनुमति नहीं है, इसलिए वह जनरल कोच में बैठे हैं। नीरा चकित रह गई और इस जानकारी ने संदेह को बदबू को गुलमेंहदी की खुशबू से बदल दिया। जिसे सारे कोच में बैठी महिलाएं महसूस कर रही थीं।

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