गिद्ध और लोमड़ी

गिद्ध, भेड़िए और लोमड़ीसब बैठें हैं, ताक मेंकौन पहले हाथ मरेगालाशों के अंबार में।कौन बचाए मुर्दों कोभूखों का खाना बनने से,लोमड़ी जैसी आखों से,जंगली चोचों और पंजो से। थोड़े बचे हुए,झांक रहे दरारों सेलूटी उम्मीद, बुझे चेहरेचीख रहे अंधियारों से। गिद्ध, भेड़िए और लोमड़ीसब बैठें हैं ताक में, फटने लगा आसमानपैने दांतों वाले ठहाकों से,आए … Continue reading गिद्ध और लोमड़ी

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नामालूम सी बात

बात थी नामालूम सी,कहीं दिल में दबी थी,मेरे बचपन से जवानी तक,गली के नुक्कड़ खड़ी थी,बात थी नामालूम सी,कहीं दिल में दबी थी,अलविदा ओ शहर,चले दूर अपने और परायों से,बस वही ,हर मोड़ पर मिली थी,बात थी नामालूम सी,कहीं दिल में दबी थी,किस्से कहां हैं पुराने,अब बातों में,बस वही एक ललक,महक पसरी हुई थी,रोशनी से … Continue reading नामालूम सी बात