गिद्ध और लोमड़ी

गिद्ध, भेड़िए और लोमड़ीसब बैठें हैं, ताक में कौन पहले हाथ मरेगा लाशों के अंबार में। कौन बचाए मुर्दों कोभूखों का खाना बनने से,लोमड़ी जैसी आखों से,जंगली चोचों और पंजो से। थोड़े बचे हुए,झांक रहे दरारों सेलूटी उम्मीद, बुझे चेहरेचीख रहे अंधियारों से। गिद्ध, भेड़िए और लोमड़ीसब बैठें हैं ताक में, फटने लगा आसमानपैने दांतों वाले ठहाकों से,आए कौन बचाने मुर्दों कोयहां जिंदा जलाए श्मशानों … Continue reading गिद्ध और लोमड़ी