नारी

नारी होती महतारी हम सब उसके आभारी महिमा नारी की निराली, अतुलनीय है नारी, सम्मान नारी है, उपमान नारी है, नारी जीवन की संभारी, यह है नारी की वाणी नारी,जिस पर घर समाज सबके सम्मान की जिम्मेदारी, घर काज, बच्चे और अतिथि, सब पर जाये वारी, करती अब वो नौकरी भी, है समानता की अधिकारी, … Continue reading नारी

हरा पत्ता

green life

साधारण

मैं हूं साधारण, आम हूँ मैं, दो हाथ दो पैर, दो- दो आँख और कान, सब कुछ सामान्य, सहज सबके सामान! साधारण हूँ मैं, खास जो होता है , मुझमे नही है, सब जैसा हूँ मैं, पर मुझ जैसे सब नहीं हैं, इसीलिए हूं साधरण मैं, भागता रहता हूँ हर घड़ी, महत्वपूर्ण होने की आस … Continue reading साधारण

उड़ान का अरमान

यूँ ही अरमान निकला….. आज हवाओ में, तैरकर, उड जाऊ परिंदों सा, पंख फैला कर, यूँ ही अरमान निकला…. पार कर जाऊ बन्दिशे सारी, सुनूं न किसी की, उड़ान भर लूँ बस. यूँ ही अरमान निकला….. कुछ और भी अरमान होंगे , तैरते हुये, हवाओ में, कोई तो मेरे लिए भी पंख खोलएगा, आज परों … Continue reading उड़ान का अरमान

हार क्यों मानूं

हार क्यों मानूं, जब तुम हो साथ, जब मैं हूं तुम्हारा अंश, हार क्यों मानूं, जब आदि तुम ही हो, अंत भी तुम हो, जब जीवन तुमसे, मृत्यु तुम हो, जब लाभ हानि भी तुम हो, जब सुख तुम हो व्याधि तुम हो, जब अकस्मात तुम हो , परिस्थिति तुम हो, जब सर्वस्व तुम हो, … Continue reading हार क्यों मानूं

क्या लिखूं

सोचती हूं क्या लिखूं, अपने नाम के साथ तुम्हारा नाम लिखूं, बार बार श्याम लिखूं मुझे, तुम साथ रहो यह अरमान लिखूं, सोचती हूं क्या लिखूं, तुम को साथ साथ उड़ा कर ले चलूंं, तुमको बादल खुद को हवा लिखूं, छिप जाऊँ सांझ ढले तुम में, तुमको घोंसला खुद को पंछी लिखूं, सोचती हूं क्या … Continue reading क्या लिखूं

क़दम