हरा पत्ता

green life

साधारण

मैं हूं साधारण, आम हूँ मैं, दो हाथ दो पैर, दो- दो आँख और कान, सब कुछ सामान्य, सहज सबके सामान! साधारण हूँ मैं, खास जो होता है , मुझमे नही है, सब जैसा हूँ मैं, पर मुझ जैसे सब नहीं हैं, इसीलिए हूं साधरण मैं, भागता रहता हूँ हर घड़ी, महत्वपूर्ण होने की आस … Continue reading साधारण

क्या लिखूं

सोचती हूं क्या लिखूं, अपने नाम के साथ तुम्हारा नाम लिखूं, बार बार श्याम लिखूं मुझे, तुम साथ रहो यह अरमान लिखूं, सोचती हूं क्या लिखूं, तुम को साथ साथ उड़ा कर ले चलूंं, तुमको बादल खुद को हवा लिखूं, छिप जाऊँ सांझ ढले तुम में, तुमको घोंसला खुद को पंछी लिखूं, सोचती हूं क्या … Continue reading क्या लिखूं

क़दम

तल्ख़ सी जिंदगी

लम्हें तल्ख़ थे, जिंदगी के कतरे तल्ख़ थे, पलटे जब चौराहे पर, सारे रास्ते तल्ख़ थे, क़दम क़दम के फासले, मीलों का सफ़र थे, जिंदगी के तालुकात, हमसे तल्ख़ थे, सुर्ख गुलाब से खिलते थे जो जज़्बात, अब जज़्बातों के अंदाज़ तल्ख़ थे, अलहदा कहानी थी, शहर के हर मोड़ की, उन मोड़ के मिजाज़ … Continue reading तल्ख़ सी जिंदगी

When you love

when you love? when you think of love love happens, But turns in obsession When exceeds passion turns in lust at end But when love flows in heart With blood gives you wings freedom to fly love is, When you don't give up you believe in "you" find love in you love is when you … Continue reading When you love