Tag: Poems

मंजिल की चाह

Hindi poems

Shehar

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love of life

आखर

आखर आखर, मिलकर शब्द बने, शब्द से वाक्य बने, जब आखर अखरे, जब शब्द बिखरे, तब वाक्य, विष बुझे बाण बने, क्या लिखूं, फैला विष जब, देह में, रहा ना अछूता, कोई अंग, हृदय था कोमल, निर्मल सा, जला विष से , हुआ बदरंग,…

नामालूम सी बात

बात थी नामालूम सी, कहीं दिल में दबी थी,मेरे बचपन से जवानी तक, गली के नुक्कड़ खड़ी थी, बात थी नामालूम सी, कहीं दिल में दबी थी,अलविदा ओ शहर, चले दूर अपने और परायों से, बस वही , हर मोड़ पर मिली थी, बात…

साधारण

मैं हूं साधारण, आम हूँ मैं, दो हाथ दो पैर, दो- दो आँख और कान, सब कुछ सामान्य, सहज सबके सामान! साधारण हूँ मैं, खास जो होता है , मुझमे नही है, सब जैसा हूँ मैं, पर मुझ जैसे सब नहीं हैं, इसीलिए हूं…

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