Tag: poetry

गिद्ध और लोमड़ी

गिद्ध, भेड़िए और लोमड़ीसब बैठें हैं, ताक में कौन पहले हाथ मरेगा लाशों के अंबार में। कौन बचाए मुर्दों कोभूखों का खाना बनने से,लोमड़ी जैसी आखों से,जंगली चोचों और पंजो से। थोड़े बचे हुए,झांक रहे दरारों सेलूटी उम्मीद, बुझे चेहरेचीख रहे अंधियारों से। गिद्ध,… Continue Reading “गिद्ध और लोमड़ी”

People

When you blame your friends and family; you probably don’t think about how you would have behaved if you were there. If you think about this simple social behaviorism , you may not blame anyone for anything. Because deep down we all are same.

उड़ान का अरमान

यूँ ही अरमान निकला….. आज हवाओ में, तैरकर, उड जाऊ परिंदों सा, पंख फैला कर, यूँ ही अरमान निकला…. पार कर जाऊ बन्दिशे सारी, सुनूं न किसी की, उड़ान भर लूँ बस. यूँ ही अरमान निकला….. कुछ और भी अरमान होंगे , तैरते हुये,… Continue Reading “उड़ान का अरमान”

क्या लिखूं

सोचती हूं क्या लिखूं, अपने नाम के साथ तुम्हारा नाम लिखूं, बार बार श्याम लिखूं मुझे, तुम साथ रहो यह अरमान लिखूं, सोचती हूं क्या लिखूं, तुम को साथ साथ उड़ा कर ले चलूंं, तुमको बादल खुद को हवा लिखूं, छिप जाऊँ सांझ ढले… Continue Reading “क्या लिखूं”

तल्ख़ सी जिंदगी

लम्हें तल्ख़ थे, जिंदगी के कतरे तल्ख़ थे, पलटे जब चौराहे पर, सारे रास्ते तल्ख़ थे, क़दम क़दम के फासले, मीलों का सफ़र थे, जिंदगी के तालुकात, हमसे तल्ख़ थे, सुर्ख गुलाब से खिलते थे जो जज़्बात, अब जज़्बातों के अंदाज़ तल्ख़ थे, अलहदा… Continue Reading “तल्ख़ सी जिंदगी”

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